उत्तराखंड: ‘कोई ऐसा सगा नहीं, जिसने कांग्रेस को ठगा नहीं’

हेमवती नंदन बहुगुणा, एक नेता जिसे कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बनाया.
मगर उसने आखिर के दिनों में कांग्रेस को मिटाने की कसम खा ली.
बहुगुणा की बेटी रीता बहुगुणा भी कभी यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष थी.
आज वह कांग्रेस छोड़ने के बाद राज्य की बीजेपी सरकार में मंत्री है.
लेकिन हम यह बात क्यों कर रहे है!
क्योंकि इसी राह पर चल रहा है इस परिवार का एक और सदस्य, नाम है विजय बहुगुणा.
जिसने उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार की कमान संभाली .
जो आज पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए कांग्रेस के ही खिलाफ राजनीति कर रहे हैं.
ये कहानी विजय बहुगुणा के उस कार्यकाल की है जिसके हिस्से में कई आरोप आए और कई घोटाले भी हुए .

सरकारी कर्मचारियों ने लुटवा दी करोड़ों की जमीन

सिडकुल उत्तराखंड सरकार का एक इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट है, जिसका खास लक्ष्य राज्य में उद्योग का विकास करना है.
इस प्रोजेक्ट में 2012 से 2017 तक हुए निर्माण कार्य, खरीद-फरोख्त, जमीन आवंटन, ठेके-आवंटन, नियुक्तियां आदि में अनियमितता का खुलासा विभागीय ऑडिट रिपोर्ट में हुआ.
सूचना के अधिकार के जरिए मिली जानकारी में खास बातें जो सामने आई है.
वो ये है कि सेलाकुई इलाके में कर्मचारियों और उद्योगपतियों की साठगांठ ने अवैध तरीके से भूमि की खरीद फरोख्त और अतिक्रमण किया.
इसके साथ ही भारी स्टांप घोटाला भी सामने आया.
जिसके पीछे एक बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया.
यह रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही कई अफसर इसके घेरे में आ गए.
इस दौरान कांग्रेस का शासन था और दो मुख्यमंत्री रहे.
शुरुआती दौर में विजय बहुगुणा ने सरकार की कमान संभाली.
करोड़ों के इस घोटाले के वक्त विजय बहुगुणा की सरकार चुपचाप ये तमाशा देखती रही.

‘बाप-बेटे दोनों ने माना दम नहीं है पंजे में’

1997 में विजय बहुगुणा ने राजनीति में कदम रखा.
लेकिन लोकसभा में पहुँचने का पहला मौका बहुगुणा को 2002 में मिला.
बहुगुणा 2007-12 तक अलग-अलग संसदीय समितियों के लिए भी काम किया. एक वक्त आया जब विजय बहुगुणा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कमान संभाली.
लेकिन बहुगुणा ने पार्टी के भीतर ही गुटबाजी के बाद कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया.
पार्टी छोड़कर जाना बहुगुणा के लिए कोई नई बात नहीं थी.
वो तो अपने पिता के नक्शे-कदम पर ही चल रहे थें.
ऐसा ही कभी पिता हेमवती नंदन ने भी किया था. जब एक लंबे अरसे तक मुख्यमंत्री रहने के बाद हेमवती नंदन ने कांग्रेस के खिलाफ इलाहाबाद सीट से ताल ठोकी थी.
राजीव गांधी के खास अमिताभ बच्चन कांग्रेस से उम्मीदवार थे. इस चुनाव में हेमवती का नारा था.
हेमवती नंदन इलाहाबाद का चंदन.
दम नहीं है पंजे में, लंबू फंसा शिकंजे में.
सरल नहीं संसद में आना, मारो ठुमका गाओ गाना
.

बाढ़ में मिले पैसे को अफसरों ने बहाया

केदारनाथ आपदा को आए 6 साल बीत गए हैं.
इस आपदा में सैकड़ों स्थानीय और पर्यटक मारे गए. राज्य में आपदा के वक्त कांग्रेस की सरकार में विजय बहुगुणा सीएम थे. लेकिन बहुगुणा पर आपदा में लापरवाही बरतने के आरोप लगे. बीजेपी ने इस दौरान आपदा घोटाले को बड़ा मुद्दा बनाया था.

केदारनाथ त्रासदी (Pic: Amar ujala)


मगर ‘राजनीति का खेल’ देखिए. कभी बहुगुणा पर हल्ला बोलने वाली बीजेपी अब इस मामले पर डिफेंसिव है. क्योंकि विजय बहुगुणा बीजेपी में है.
देवभूमि उत्तराखंड के माथे पर आपदा-घोटाले का कलंक लग गया. इस आपदा घोटाले के बाद उत्तराखंड का नाम पूरे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बदनाम हो गया. दरअसल साल 2013 की आपदा के बाद केंद्र सरकार ने राज्य को राहत राशि दी. साल 2013-14 से साल 2015-16 के बीच 6,259.84 करोड़ रुपए राहत पैकेज दिया गया. आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुर्ननिर्माण के लिए मिले धन से अफसरों ने ऐसे काम भी करवा दिए जिनकी जरूरत ही नहीं थी. सरकारी अधिकारियों की लापरवाही के चलते पीड़ितों को राहत भी नहीं मिली और उत्तराखंड़ को फिर से बसाने वाले प्रोजेक्ट यूं ही लटके रह गए.
इन गैरजिम्मेदार अफसरों ने विश्व बैंक से मिले पैसों में भी खूब घपलेबाजी की. विश्व बैंक से मिले 1100 करोड़ रुपये में 274.29 करोड़ रुपये का उपयोग नहीं हो पाया.  यह पैसा अफसरों ने लौटाने के बजाए बैंकों में यूं ही पड़े रहने दिया.
इन अफसरों ने सरकार पर बेवजह से 19.88 करोड़ रुपये का ब्याज लगवा दिया. आपदा राहत और बचाव कार्यों को जल्दी करने के लिए उड्डयन विभाग की योजनाएं भी हवा-हवाई ही साबित हुई.
यही हाल पर्यटन विभाग की योजनाओं का भी रहा.


दरबार पूरे प्रदेश को लूटता रहा और राज्य की कमान हाथ में लिए बहुगुणा धृतराष्ट्र की तरह चुपचाप तमाशा देखते रहे.
विपक्ष में बैठी बीजेपी ने तो हल्ला किया ही, सरकार में साझीदार लोगों ने भी बगावत के सुर तेज कर लिए. नतीजा ये हुआ कि विजय बहुगुणा को कुर्सी छोड़नी पड़ी.
उनकी जगह कुर्सी संभाली उन्हीं की पार्टी मे बगावती नेताओं को शह देने वाले हरीश रावत ने.

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