ओवरलोडिंग के ओवरलोड से खराब होती दिल्ली की सेहत

दिल्ली में ओवर लोडिंग की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है.
ओवरलोडिंग की समस्या का सामना केवल दिल्ली राज्य ही नहीं बल्कि पूरा देश इस समस्या से जूझ रहा है. कमर्शियल वाहन तो खूब ओवरलोड होते ही है पर अब तो सार्वजनिक वाहन भी ओवरलोड होने लगे हैं.
साथ ही दिल्ली को वर्ल्ड क्लास बनाने वाली मेट्रो हो या शेयरिंग ऑटो सब लोगों से खचाखच भरी हुई है.
दिल्ली और एनसीआर की बात करें तो यहां कई लोग नौकरी के सुनहरे भविष्य का सपना लेकर यहां आते हैं जिन्हें शायद नौकरी तो मिल सकती है. लेकिन सार्वजनिक वाहनों में जगह मिल पाना बहुत मुश्किल है.
यह वाहन नियमों की अनदेखी करने से भी नहीं चूकते.
तो आज बात इसी मुद्दे पर कि कैसे नियमों की धज्जियां उड़ती है और प्रशासन मौन रहता है.

किस वाहन में बैठ सकते हैं कितने लोग

ऑटो में 4 लोगों की सीट होती है.
बस में लगभग 30 से 50 लोगों की सीट होती है.
मेट्रो के 1 कोच लगभग 64 लोगों की सीट होती है.
इसके उलट किसी भी वाहन में अगर सामान्य संख्या से अधिक लोग बैठते हैं तो इससे ओवरलोडिंग की समस्या पैदा होती है.

आखिर क्यों होती है ओवरलोडिंग!

ऑटो चालक अपने ऑटो में चार के बदले कम से कम 11 लोगों को बैठाता है. बस में 50 से 70 लोग सफर करते हैं.
मेट्रो के 1 कोच में लगभग 80 से 100 लोग सफर करते हैं.
इस तरह ओवरलोडिंग की समस्या एक गंभीर समस्या बनी हुई है जिससे निपटने के लिए किसी तरह का कोई प्लान नहीं है. जिसके चलते लोग मजबूर हो जाते हैं कि वो भूसे की तरह एक के ऊपर एक लदकर सफर करें. ऑटो, बस और मेट्रो का ओवरलोड होना दिल्ली एनसीआर में आम बात है. जिसकी वजह से कई बार दिल्ली की बसें एक तरफ झुककर चलती हैं.
ये आपको उन जगहों पर ज्यादा देखने को मिलेगा जहां पर मेट्रो सेवा मौजूद नहीं है. यह रूट दिल्ली के जहांगिरपुरी से नरेला और अजादपुर से नजफगढ़ का है. ये दिल्ली की वो जगह है जहां पर आप ओवरलोडिंग का नमूना साफ तौर पर देख सकते हैं.
दिल्ली मेट्रो की ब्लू और रेड लाइन पर भी भारी भीड़ पाई जाती है. जिस वजह से ओवरलोडिंग की समस्या होती रहती है.

दिल्ली एनसीआर में ओवरलोडिंग के लिए कानून भी बने हुए हैं. लेकिन इन जगहों पर लगता है कि कानून केवल मूक दर्शक का काम कर रहा है. ओवरलोड वाहनों में सफर करना लोगों की मजबूरी भी है क्योंकि दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों मे आज भी सार्वजनिक परिवहन बहुत कम पाए जाते हैं.  इन इलाकों में वाहनों की आवाजाही बहुत कम है. लोगों को घंटों बसों और ऑटो का इंतजार करना पड़ता है.

ऐसा ही कुछ हाल भारतीय रेलवे का है इसमें जो जनरल कोच है उसमें भी तय सीमा से अधिक लोग सफर करते हैं. ये नजारा आपको पूरब की तरफ जाने वाली ट्र्रेन में देखने को मिलोगा. इस साल दिल्ली से यूपी के बांदा जाने वाली ट्रेन के जनरल कोच में भारी भीड़ के चलते एक युवती की मौत हो गई थी.  इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि ट्रेन के उस कोच में कितनी भीड़ रही होगी.

दिल्ली एनसीआर में कई बार यह ओवरलोडिंग जानलेवा भी साबित होती है. कभी-कभी रोड ऐक्सिडेंट होने का एक कारण ओवरलोडिंग भी होती है. हम सबने कई बार देखा भी होगा कि कुछ जगहों पर लोग बसों की छतों पर भी सफर करने को मजबूर हैं अब जरा सोचिए कि अगर इन हालतों में कोई बड़ी दुर्घटना घटती है तो उसका दोषी कौन होगा.

दिल्ली की इस योजना से मिलेगी राहत!

दिल्ली में बसों की भारी कमी है जिसकी वजह से बसों में ओवर लोडिंग होती है.  बसों की इस कमी का एक कारण यह भी है कि बसों की खरीद का मामला अभी कोर्ट मे है. जिसकी वजह से नई बसें दिल्ली में नही आ पा रहीं हैं. दिल्ली सरकार ने 1000 नई ई-बसें खरीदी हैं.  जिनके दिसंबर के आखिर तक आने की उम्मीद है.
दिल्ली सरकार अगर मेट्रो के कोच बढ़ा दे या मेट्रो की संख्याओं में बढ़ोतरी कर दे तो उम्मीद है कि ओवरलोडिंग का समाधान हो सकता हेै.

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