NSA : भारत का जेम्स बोंड

“आप एक मुंबई हमला कर सकते हैं लेकिन हो सकता है की आप बलूचिस्तान खो दें”

अपने विरोधियों को ईंट का जवाब पत्थर से देने वाले अजीत डोभाल ने एक बार कहा था-पाकिस्तान भारत से कई ज्यादा नाजुक है, एक बार उन्हें यह एहसास हो जाए कि भारत ने अपना मोड रक्षात्मक से बदल कर रक्षात्मक आक्रामक कर लिया है तो वह भारत को परेशान करने की जुर्रत नहीं कर पाएगा, आप एक मुंबई हमला कर सकते हैं लेकिन हो सकता है की आप बलूचिस्तान खो दें

चाहे वो मिज़ोराम में आतंकियों की चोटियों के नेतृत्व को भेदना हो,
या ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान आईएसआई खुफिया अधिकारी का भेष धारण कर सवर्ण मंदिर के अंदर की गुप्त सूचनाएं निकालनी हो,
या कंधार विमान अपहरण कांड के दौरान तालिबान से बातचीत करना हो, भारत के खुफिया मास्टर आजीत डोभाल ने समय-समय पर देश के लिए कई महत्तवपूर्ण भूमिकाए निभाई हैं.

किस्से

किस्से ऐसे हैं कि जेम्स बोंड के किस्से फीके पड़ जाए.
किस्से ऐसे कि मिशन इम्पॉसिबल में टॉम क्रुज के किस्से कम पड़ जाए.
आपने अनेको फिल्में देखी होंगी जहां हीरो किसी और देश में जासूस बनकर खुफिया जानकारी इकट्ठी करता है और बाद में उनसे लड़ता है. ठीक वैसा ही इनका जीवन भी रहा है.
यह मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि वह अपने अब तक के जीवन में बहुत से ऐसे काम कर चुके हैं, जिससे ना सिर्फ पाकिस्तान बल्कि उनकी ही पार्टी के कुछ नेता भी सहमे-सहमे से रहते हैं.
पाकिस्तान में तो उन्हें भारत का जेम्स बोंड कहा जाता है.

कैसी शख्सियत के मालिक हैं अजीत डोभाल

20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड की खुबसूरत वादियों में जनमें, बुद्धिशाली, 33 साल का करियर में देश के लिए हमेशा प्रतिबद्ध, यहां तक कि पाकिस्तान में रिक्शा चालक तक बन चुके, कुछ ऐसे हैं अजीत डोभाल.
ना किसी का खौफ, ना मृत्यु से डर. अपने देश की शान बढ़ाने के लिए पूरी तरह कर्मठ, कुछ ऐसे हैं अजीत डोभाल. बिल्कुल शांत स्वभाव, विनम्र शख्सियत और अपने फैसलों पर अडिग, कुछ ऐसे हैं अजीत डोभाल.
हम जब भी भारत में किसी जासूसी मिशन के बारे में बात करते हैं तो हमारे जेहन में सबसे पहले अजित डोभाल का नाम ही आता है.

अहम कार्य, अहम भूमिकाए:

– अजीत डोवाल ने पाकिस्तान में 7 साल रिक्शा चालक के भेष में जासूस बनकर बन कर बिताए थे और देश के लिए अहम जानकारी एकत्रित की थी. इसी दौरान वह वहाँ की आर्मी में  मार्शल की पोस्ट तक भी पहुंचे.
-1984 में भारतीय सेना द्वारा चलाया गया ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के वक़्त अजीत डोवाल ने पाकिस्तानी जासूस की भूमिका में खालिस्तान समर्थकों का विश्वास जीता था और सेना को गुप्त सूचना मुहैया करवा कर आपरेशन सफल बनाया था.
-1999 में इंडियन एयरलाइन्स की फ्लाइट-814 को काठमांडू से हाईजैक कर लिया गया था तब डोवाल को ही मुख्य वार्ताकार बनाया गया था .
-जब 1993 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू  को बंधक बनाया तो अजीत डोवाल ने ही उसे बचाने की भी सफल योजना बनायी थी.
-उत्तर पूर्व में मिजो नेशनल फ्रंट ने हिंसात्मक माहौल को कम करने और उनका  विश्वास जीतकर वहाँ का माहौल शांतिप्रिय बनाने में उनकी अहम भूमिका थी.
-उत्तर पूर्व में सेना पर हुए हमले के बाद सीमा पार करके आतंकियों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की सफल योजना भी अजीत डोवाल की बुद्धिमत्ता का प्रतीक है, जिसमे सेना ने म्यामार में 5 किलोमीटर अंदर घुसकर करीब 50 आतंकियों को मौत के घाट उतारा था.
-बलोचिस्तान में RAW को फिर से एक्टिव करके उसे अंतराष्ट्रीय मुद्दा भी बनाया था.
– कहा जाता है कि मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान 7 देशों के राष्ट्रअध्यक्षों को भारत आने के न्योता देने  के पीछे का दिमाग भी अजीत डोवाल का था.
-उन्होंने पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के साथ मिलकर खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के दल के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी.
-जम्मू-कश्मीर में घुसपैठियों और शांति के पक्षधर लोगों के बीच काम करते हुए डोभाल ने कई आतंकियों को सरेंडर कराया था.
-जून 2014 में, डोभाल ने आईएसआईएस के कब्जे से 46 भारतीय नर्सों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
-अजीत डोभाल 33 साल तक नार्थ-ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में खुफिया जासूस रहे हैं, जहां उन्होंने कई अहम ऑपरेशन किए हैं.

इसके अलावा उन्होंने समय-समय पर देश को कईं बड़े आतंकी हमलों से बचाया है.
साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को देश के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया था. भारत के NSA अजित डोभाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत ख़ास माना जाता है.

आप अजीत डोभाल की जीवनी का अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि जो मैडल किसी आईपीएस अफसर को 17 साल काम करने के बाद दिया जाता है, वो मैडल अजीत डोवाल को सिर्फ 6 सालो में ही मिल गया था.
वह भारत के एक मात्र ऐसे नॉन आर्मी पर्सन हैं जिन्हें कीर्ति चक्र से नवाजा गया है.
इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय पुलिस मैडल से भी नवाज़ा गया है.

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