खत्म होता गाँव: हमारी जमीनें मत छीनो एसडीएम साहब

हम विश्व के सब से बड़े लोकतंत्र में रहते हैं.
हमारे संविधान की प्रस्तावना हमे मूलभूत अधिकार भी देती है.
पर जरा सोचिये आप सुबह-सुबह उठें और आपको पता चले की आपका घर, आपकी जमीन पर अब आपका मालिकाना हक़ नहीं रहा.
एक पल को क्या गुजरेगी आप पर.
किसी लोकतंत्र में क्या ऐसा हो सकता है!
शायद नहीं ना…
ऐसा हो रहा है.. विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में हो रहा है.. और हम सब खामोश हैं..

ना खाता ना बही, जो हुजूर कहें वही सही

ये कहानी जब मेरे पास आई तो एक पल को मुझे भरोसा ही नहीं हुआ.
समझ ही नहीं आ रहा था की आजाद भारत की ऐसी तस्वीर कैसे हो सकती है.
मामला उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल का है.
टिहरी गढ़वाल का एक गाँव है गौजियाणा, घनसाली तहसील के अंतर्गत आता है.
वहां से नवीन कंसवाल ने हमें ये ख़बर भेजी है.
आगे की कहानी नवीन की जबानी.

माजरा क्या है..

दिनांक 06 .09.2019 को ग्राम गौजियाणा में एक घटना हुई, आमडाला क्षेत्र में कुछ बाहरी लोगों के द्वारा अचानक आकर श्री देवेंद्र कंसवाल व श्री अमरदेव कंसवाल जी(पुत्र स्व0 श्री पूर्णानंद) ,अमर देव ,सर्वदेव,बद्रीप्रसाद,हर्षमणि व सुरजमणि कनस्वाल के खेतों की फसल नष्ट कर जबरन कब्जा कर खेतो की खुदाई का काम किया जाने लगा , जमीन मालिकों के गांव से बाहर होने के कारण घर की महिलाओ द्वारा विरोध किया गया तो उनके साथ जोर जबरदस्ती, अभद्रता की गयी , दोपहर बाद सारे गांव को खबर होने पर सभी महिला पुरुष घटनास्थल पर आए और जमकर हंगामा किया गया अंततः किसी तरह सबको खदेड़ दिया गया ,
मामले की जानकारी लेने पर ज्ञात हुआ कि उक्त स्थान पर बिजली का टावर लगाया जाना है और जमीन अधिग्रहित कर ली गयी है , जबकि जमीन मालिकों के कहना है कि उनको किसी भी प्रकार की लिखित सूचना अथवा नोटिस ,इस सम्बन्ध में आज तक भी प्राप्त नही है कि उनकी जमीन किस विभाग ने, किस प्रयोजन हेतु ,कौन से एक्ट के तहत ,कब अधिग्रहित कर ली है।
गांव के पूर्व प्रधानों का कहना है कि 2012 से लिखित रूप से इस विधुत लाइन के कार्य के लिये लगातार आपत्ति दर्ज कराई गई है कि यह 220 Kv हाईटेंशन लाइन गांव के बीच न ले जाकर बाहर से ले जाई जाय,इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत ने कभी किसी विभाग या कम्पनी को कार्य करने के लिए अनापति प्रमाण पत्र ( जो किअति आवश्यक होता है ) नही दिया है
दिनांक 7:09:2019 को सभी ग्राम वासी घनसाली थाने रिपोर्ट लिखाने गए तो थानेदार ने रिपोर्ट दर्ज करने से साफ मना कर दिया , हम लोग शाम 6 बजे तक अड़े रहे कि बिना शिकायत दर्ज किए घर नही लौटेंगे तो मजबूरन थानेदार साहब को हमारा शिकायत पत्र recieve करना पड़ा । रिपार्ट दर्ज नही की गई।
उसी शाम Sdm साहब के समक्ष पूरे प्रकरण की जानकारी लिखित में दी गयी और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्यवाही के लिए निवेदन किया परंतु sdm साहब द्वारा पहले तो कहा गया कि उनके स्तर का मामला ही नही है ,फिर उनके द्वारा बताया गया कि कोई ऐसा एक्ट है जिसमे कास्तकार की जमीन सरकार या कंपनी ले सकती है उनसे बिना अनुमति के और किसी को सूचित करना जरूरी नही है ,न ही किसी की सहमति चाहिए न ही ग्राम पंचायत का अनापति प्रमाणपत्र। हमारे द्वारा उस एक्ट की कॉपी मांगी गयी ,जमीन नोटिफिकेशन की कॉपी मांगी गई परन्तु sdm साहब कुछ उपलब्ध नही करवा पाए और दे दूंगा बोलकर हमको चलता किया ।
साफ है कि पूरा शासन, प्रशासन, पुलिस सभी एल एंड टी कम्पनी के एजेंट की तरह काम कर रहे है और जिनको हम पहाड़ के मूल निवासियों के हितो की रक्षा करने के लिए नियुक्त किया गया है वो लोग इन बड़ी बड़ी कम्पनियो, बाहरी लोगो के हाथ बिके हुए है यंहा तक कि हमारे घनसाली के पत्रकार खबर छापने तक को तैयार नही है.

ग्राम गौजियाणा के बारे में जानकारी देना चाहूंगा, टिहरी बांध हेतु आंशिक डूब क्षेत्र में होने कारण 30 प्रतिशत गांव अधिग्रहित कर लिया गया था,
टिहरी बांध के जलाशय के कारण निकटवर्ती जमीन पर भूधँसाव होने के कारण 2010 के बाद 20 प्रतिशत हिस्से को खाली करवा दिया गया ,कुछ मकान टूट गए और कुछ रहने लायक नही रहे इसलिए प्रशासन के द्वारा खाली करवा दिए गए और विस्थापित करने का आश्वाशन दिया गया जो आज तक नही किया गया ।
घोंटी हल्का वाहन पुल निर्माण हेतु जमीन अधिग्रहित की गई
पुरानी सड़क टिहरी बांध में डूबने पर नई सड़क हेतु जमीन अधिग्रहित की गई ।
2018 में गांव के एक हिस्से में भारी भूस्खलन हुआ जिसमें भारी माल हानि व पशु हानि हुई जिसका आज तक मुआवजा तक नही मिला । और अवशेष गांव का आधा क्षेत्र सवेंदनशील हो गया जिसमें लोग निर्माण नही कर सकते ।
ले देकर थोड़ा सा सुरक्षित भूमि शेष है हमारे पास उसको भी बिधुत लाइन के बाद किसी उपयोग में नही लाया जा सकता , हमने विकास कार्य हेतु हमेशा जमीन दी है परंतु प्रशासन के द्वारा हमे हमेशा बदले में धोखा दिया गया है ,
इसके अलावा इस तरह जबरन कब्जा करना पूरी तरह गैरकानूनी है , ग्रामसभा की आपत्ति को खारिज तक नही किया गया , न ही अनापति प्रमाणपत्र लेना आवश्यक बताया गया ,मतलब ग्राम पंचायत का कोई वजूद ही नही रह गया इन बड़ी कंपनियों के समक्ष ।

इस विवाद के संबंध में एक और विशेष बात सामने आई है
यह विवाद जानबूझकर बनाये रखा गया इसका कारण बताता हूँ
L&T कम्पनी को यह कार्य 31 मार्च 2019 तक समाप्त करना था कुल एक वर्ष के भीतर ,नही तो प्रत्येक दिन सरकार को 55लाख का राजस्व की हानि होनी है, ऐसे दस्तावेज है ।
परन्तु दिसम्बर 2018 तक कम्पनी केवल 30 % कार्य कर पाई ,शेष 3 माह में अवशेष 70 % कार्य कर पाना संभव नही था और कंपनी और pitcul के पास इस मामले से बचने का कोई रास्ता नही था इसलिये यह विवाद जिंदा रखा गया और निपटाने की कोशिश भी नही की गई क्योंकि अपने बचाव में सरकार के समक्ष इनके द्वारा यह तथ्य रखा जाएगा कि कास्तकारो के द्वारा विवाद होने के कारण कार्य सम्भव नही हो पाया ,
अन्यथा मार्च 2019 से से पूर्व इस तरह का कदम क्यो नही उठाया गया । अनुबंध की तिथि समाप्त हो चुकी है कार्य पूर्ण नही हो पाया है सरकार को अब तक 84.15 करोड़ रु से ज्यादा के राजस्व की हानि हो चुकी है ।अधिकारियों पर कोई गाज नही गिरे इसके लिए हमारे गांव के कास्तकारों को अपने बचाव के लिए ढाल बनाया गया है ।इसमें प्रशासन उनकी पूरी मदद कर रहा है ।

बात हमारे हिस्से की

इस कहानी को आप तक पहुचाने के बाद मोजो भारत की जिम्मेदारी ख़त्म नहीं हुयी है.
हम नवीन और उनके गाँव के साथ हैं.
उनकी आवाज को पूरी मजबूती के साथ राजपथ के गलियारों तक पहुचाने की जिम्मेदारी हमारी है.
हम ये जिम्मेदारी जरुर निभायेंगे.
देश और समाज के प्रति, जनपथ के प्रति हम अपने हिस्से का हक़ जरुर अता करेंगे.

3 thoughts on “खत्म होता गाँव: हमारी जमीनें मत छीनो एसडीएम साहब

  1. बहुत खूब
    यह सत्य है कि
    अत्याचार सहन, अत्याचार करने से बड़ा अपराध है।
    वैचारिक तौर पर पूरा लोकतंत्र आपके साथ खड़ा है।

  2. हमारे गांव गौजियाणा पर प्रकृति
    और दलालों की मार है। आधा गांव टिहरी
    बांध की झील के कारण भूस्खलन की चपेट
    मे है तो सरकारी कर्मचारी कंपनियों के दलाल
    बनकर जमीन कब्जाने को उतावले हैं। हम इन्हें
    सफल नहीं होने देंगे।

  3. मोजो टीम को नमन सहित प्रतिवादी पक्ष के जवाबी समाचार की प्रतीक्षा में…

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