मौत: निडर पत्रकारिता का इनाम

हमने अपने पेशे से बगावत करके जिस इमानदार पत्रकारिता की शुरुआत की है, हमें नहीं पता कि वो हमें किस ओर लेकर जायेगी.
लेकिन आज हमने सोचा कि क्यों ना आपसे पत्रकारिता की वर्तमान चुनौतियों और जोखिमों पर बात की जाए.
पिछले 25 वर्षों में 2,297 पत्रकार और मीडिया कर्मी मारे गए.
1992 से अब तक भारत में 95 पत्रकारों की हत्या की गई.
वर्ल्ड प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2019  में भारत को 140वां स्थान पर रखा गया है.
पिछले तीन वर्षों में कई निडर पत्रकारों की हत्या कर दी गई.

सच बोलोगे तो मारे जाओगे

दुनिया भर में लोगों तक खबर पहुंचाने वाले पत्रकार कब खुद बेखबर हो जाते हैं पता ही नहीं चलता. विश्व स्तर पर सबके अधिकारों की बात करने वाले पत्रकार, कब खुद अपने मौलिक अधिकारों की लड़ाई लड़ते-लड़ते मारे जाते हैं पता ही नहीं चलता.
लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले मीडिया का सरेआम कत्ल कर दिया जाता है. किस तरह प्रसाशन द्वारा कलम की स्याही निचोड़ी जाती है, वह भी किसी से नहीं छुपी है. दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों से मतभेद रखने वाले पत्रकारों को गोली मार दी जाती है.
प्रशासन के खिलाफ बोलने वाले पत्रकारों की आवाज़ दबा दी जाती है.
मीडिया जगत में पत्रकारों पर हो रहे हमलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

ऐसे देश जहां पत्रकारों को है खतरा

पिछले 25 वर्षों में 2,297 पत्रकार और मीडिया कर्मी मारे गए.
इनमें  इराक में 309, फिलीपींस में 146, मैक्सिको में 120, पाकिस्तान में 115, रूस में 109, अल्जीरिया में 106, भारत में  95, सोमालिया में 75, सीरिया में 67 और ब्राजील में 62 हत्याएं हुई.
पत्रकारों के लिए इराक सबसे घातक देश है, जहाँ अकेले 2015 में 112 पत्रकार मारे गए, हालांकि यहाँ सबसे अधिक वर्ष 2006 में 155 पत्रकारों की हत्याएं हुई.

भारतीय प्रेस परिषद की रिपोर्ट

भारतीय प्रेस परिषद की रिपोर्ट के अनुसार साल 1992 से अब तक भारत में 95 पत्रकारों की हत्याएं की गई है, जिसमें सिर्फ एक ही मामला आदालत की चौखट तक पहुंच पाया है. इसी साल राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उम्रकैद कि सजा सुनाई गई. गोविंद पनसारे, गौरीलंकेश, सुजात बुखारी, डॉ. नरेंद्र दाभोलकर, कलबुर्गी जैसे कुछ बड़े नाम हैं जिनकी निर्ममता से हत्या कर दी गई.

वर्ल्ड प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत को 140वां स्थान 

2019 WORLD PRESS FREEDOM INDEX

रिपोर्टर्स विदाउट बोडर्स की एक वैश्विक सूची-वर्ल्ड प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2019  में भारत को 140वां स्थान पर रखा गया है. भारत में पत्रकारों को कितनी आजादी है, यह इस रिपोर्ट में साफ बयान हो रहा है. पिछले कुछ सालों में इस रैंकिंग में लगातार गिरावट देखने को मिली है. पत्रकारों के लिए भारत दुनिया के 6 सबसे घातक देशों में से एक है.

कितने पत्रकारों के हत्यारों को मिली सजा

COMMITEE TO PROTECT JOURNALISTS

भारत पत्रकारों के हत्यारों को सजा दिलाने के मामले में काफी पीछे है. पत्रकारों की सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र, गैर-लाभकारी संगठन- कमिटी टु प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (सीपीजे) की रिपोर्ट ने यह साफ किया है. आपको बता दें कि इस सूची में उन देशों को शामिल किया जाता है जिनमें पत्रकारों कि हत्याओं पर कोई शस्तक कार्यवाई नहीं की गई हो. भारत को लगातार 11वीं बार इस सूची में शामिल किया गया है. कानूनी ढांचे, पारदर्शिता, स्व सेंसरशिप, और मीडिया की स्वतंत्रता के आधार पर भारत को इस सूची में शामिल किया गया है.जबकी साल 2016, 2017 और 2018  पत्रकरों के लिए बेहद खराब रहे. पिछले तीन वर्षों में कई निडर पत्रकारों की हत्या कर दी गई. इनमें गौरी लंकेश और सुजात बुखारी जैसे निडर पत्रकारों  का भी नाम है जिन्हें मौत के घाट उतार दिया गया. इनसे हट कर कितने मामले तो ऐसे होंगे जिन पर कभी कोई प्रकाश ना डला हो.

कुछ ऐसे निडर पत्रकार जिनकी जबरन हत्या कर दी गई

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर

2013 में पुणे में डॉ. नरेंद्र दाभोलकर को गोलियों से छलनी कर दिया गया था. दाभोलकर लगातार अंधविश्वास और कुप्रथाओं के साथ खिलाफ आवाज उठाने में आगे थे. यही कारण था कि वह सनातन संस्थाओं और दक्षिणपंथियों के निशाने पर रहते थे. उनकी भी बड़ी निर्दयता के साथ हत्या कर दी गई थी.

गोविंद पनसारे

वहीं महाराष्ट्र में 2015 में ही सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद पनसारे की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उनकी पत्नी को भी हमलावरों ने निशाना बनाया था.

कलबुर्गी

वर्ष 2015 में कर्नाटक के धारवाड़ में इसी तरह साहित्यकार एमएम कलबुर्गी की उनके घर पर ही हत्या कर दी गई थी. इस केस में दो लोगों पर कलबुर्गी की हत्या करने का आरोप लगा था. इस मामले में अभी तक किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

गौरी लंकेश

दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों से मतभेद रखने वालीं गौरी लंकेश साप्ताहिक मैग्जीन ‘लंकेश पत्रिका’ की संपादक थी. गौरी कई टीवी डिबेट्स में भी हिस्सा लेती थीं. बंगलुरु के राजराजेश्वरी इलाके में रहने वाली लंकेश को बाइक सवारों ने नजदीक से 7 गोलियां मारी थी. जिनमें से उनके सिर पर तीन गोलियां दागी गईं और उनकी तत्काल मौके पर मौत हो गई थी.

सुजात बुखारी

जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में निड़र पत्रकार एवं ‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी और उनके पीएसओ की गोली मारकर हत्या कर दी गई. अज्ञात हमलावरों ने शुजात बुखारी के कार्यालय के बाहर उनपर हमला किया था.

आखिर कब तक कलम ऐसे ही तोड़ी जाएगी ? आखिर कब तक पत्रकारों की आवाज़ ऐसे ही दबाई जाएगी ?
इन तमाम जोखिमों आर कुर्बानियों के बाद भी कोई जज्बा हेै जो हम पत्रकारों को हिम्मत देता है, हौंसला देता है.
तमाम स्वालों के बीच आप सभी से यह वादा हम कर रहे हैं की मोजो भारत अपनी ईमानदार पत्रकारिता को जिंदा रखेगा.

4 thoughts on “मौत: निडर पत्रकारिता का इनाम

    1. उसका विवरण भी हम आप तक बहुत जल्द पहुंचाएंगे. हमसे जुड़ने के लिए बेहद शुक्रिया. आगे भी आपके कीमती सुझाव हम तक पहुंचाते रहीएगा.

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