दिल्ली में बैठे पाकिस्तानी आईटी सेल का खुलासा (पार्ट-2)

पिछले अंक में मैंने आपको बताया था कि किस तरह एक भारत के मोबाइल नंबर से एक पाकिस्तानी पत्रकार का फेसबुक पेज संचालित हो रहा था.
इस पेज पर लगातार भारत विरोधी सामग्री पोस्ट भी की जा रही थी.
इस बात का अंदेशा होने लगा था मुझे कि दिल्ली में कोई तो बैठा है जो उस पाकिस्तानी पत्रकार की मदद कर रहा है.
कोई तो है, जो देश के दिल में बैठकर. अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के बीच असंतोष की भावना पैदा करने की कोशिश कर रहा है. जब इस पेज पर अचानक पाकिस्तानी नम्बर दिखने लगा तब तो मेरा शक यकीन में बदलता गया.
अगर आपने पिछला अंक नहीं पढ़ा हैं तो यहाँ क्लिक करें…

कहानी यहाँ से शुरू करते हैं

मुझे उस पाकिस्तानी पत्रकार के फेसबुक पेज पर जो दिल्ली एनसीआर का नंबर मिला था, जो 8447 से शुरू होकर 76 पर खत्म होता था, वो नम्बर ट्रू कॉलर पर एक नाम दिखा रहा था.
नाम था शन्नो बेगम.

ट्रू कॉलर रिजल्ट


मीडिया में काम करने का एक अच्छा फायदा ये भी होता है कि कई नाम याद हो जाते हैं.
शन्नो बेगम का नाम भी याद था मुझे..
कुछ दिनों पहले लगभग सभी मीडिया घरानों ने इनकी तारीफ में कसीदें पढ़ी थी.
ये भारत की पहली महिला उबर ड्राईवर हैं जिन्होंने अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए जीवटता का परिचय देते हुए 40 की उम्र में गाड़ी चलाना सीखा था.

गूगल सर्च रिजल्ट


इनकी जीवटता को काफी सराहा था पूरे देश ने और देखते-देखते शन्नो बेगम एक रोल मॉडल बन गयी थी.
मशहूर अदाकार आमिर खान ने भी इन्हें अपने शो सत्यमेव जयते का हिस्सा बनाया था.

आमिर खान शन्नो बेगम के साथ



शन्नो बेगम एक संघर्षशील महिला का नाम था इसलिए मैं अचम्भित हो गया.

यकीन करना मुश्किल था की शन्नो बेगम जैसी महिला ऐसी किसी गतिविधि में शामिल होगी.
यकीन तो अभी भी नहीं होता पर जो सबूत मिलें हैं वो आप सबके बीच रख रहा हूँ.

वो नम्बर शन्नो बेगम का है!

वो नम्बर शन्नो बेगम के नाम पर वोडाफोन से लिया गया था.
उस नम्बर को लेने के लिए जो पहचानपत्र उपलब्ध कराए गए थे वो शन्नो बेगम के थे.

उस पहचान पत्र में दिल्ली का पता था.

ये जानकारी हमे गोपनीय तरीके से प्राप्त हुयी है, इसलिए सूत्रों का खुलासा नहीं कर सकते.
सरकारी एजेंसियां चाहें तो वोडाफोन से इस बाबत जानकारी माँग सकती हैं.
नम्बर तो शन्नो बेगम के नाम पर ही था पर सवाल ये था क्या शन्नो वाकई इन सबमे इन्वाल्व हैं.
इसकी अगली कड़ी जुड़ी फेसबुक से.

फेसबुक पर भी मिला शन्नो कनेक्शन

उस नम्बर को लेकर शुरू की गयी मेरी सारी तहकीकात उसी नम्बर के इर्द-गिर्द घूम रही थी.
अब मैंने शन्नो बेगम का फेसबुक अकाउंट खोजना शुरू किया.
शन्नो अब एक जाना-पहचाना नाम थी इसलिए उनका फेसबुक अकाउंट खोजने में तकलीफ नहीं हुयी.
हमे उनका फेसबुक अकाउंट आसानी से मिल गया जिस पर लगातार प्रो इस्लामिक चीजें शेयर की जा रही थी.
हमे इससे कोई दिक्कत नहीं थी, ना है.

शन्नो का फेसबुक अकाउंट

पर हमने एक तहकीकात और की..


हमने फेसबुक के फॉरगेट पासवर्ड आप्शन का लाभ लेते हुए नोटिफिकेशन किस नम्बर पर जाएगा इसकी तहकीकात करने की कोशिश की.

हम फिर हैरान थे, क्योंकि फेसबुक द्वारा दिए गये अंतिम दो अंक हुबहू उसी नम्बर से मैच कर रहे थे, जो नम्बर मुझे उस पाकिस्तानी पत्रकार के फेसबुक से मिला था.

फॉरगेट पासवर्ड करने के बाद मिले नम्बर के आखिरी दो अंक

आगे क्या

मैं अभी भी इस बात का दावा नहीं कर रहा कि शन्नो बेगम गुनहगार हैं.
पर मेरी तहकीकात ने इतना तो साबित कर ही दिया है, कि दाल में कुछ तो काला है.
अगर शन्नो इन सबमें शामिल नहीं हैं तो कोई तो है जो उनके आस पास है, उनका बेहद करीबी है.
इतना करीबी की वो शन्नो के पहचानपत्र पर सिमकार्ड हासिल कर सकता है.
जो शन्नो का फेसबुक अकाउंट बना सकता है.

मेरी तहकीकात अभी भी ख़त्म नहीं हुयी है.
ये पहली कड़ी है.. ऐसे कई नाम हैं जो धीरे-धीरे आपके सामने इस सीरिज में लाता रहूँगा तब तक जब तक मकी भारत सरकार इसका संज्ञान ना ले.

एक अपील है आप सभी से इस स्टोरी को देश-हित में अधिक से अधिक साझा करें ताकि देश को जागरूक किया जा सके.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *