सीबीआई: कैद में है बुलबुल और सैयाद मुस्कुराए

किन-किन नेताओं को सलाखों के पीछे डाला गया
कौन-कौन से नेता हैं बेल पर
कौन है वो कद्दावर नेता जिन पर है भ्रष्टाचार के मुकदमें
किसी पर नरम और किसी पर सख्त रुख क्यों अपनाए बैठी है सीबीआई
सीबीआई सिर्फ विपक्षी पार्टियों के नोताओं के खिलाफ क्यों कर रही है कार्रवाई
क्या बीजेपी में कोई भ्रष्टाचारी नहीं, क्या किसी के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं

दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में सबसे बड़ी समस्या बढ़ती आबादी नहीं बल्कि भ्रष्टाचार है. भारत की राजनीति में भ्रष्टाचार के मामलों की लम्बी कतार है.
भारत की राजनीति में भ्रष्टाचार कोई नया मुद्दा नहीं है, पर स्वस्थ लोकतंत्र के लिए इस मुद्दे पर चर्चा होती रहनी चाहिए.
बात तब और गंभीर हो जाती है जब दलितों की बात करने वाले नेता पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं, बात तब गंभीर हो जाती है जब जनता के हितो की बात करने वाले नेता, उसी जनता के पैसे से अपनी तिजोरियां भरते हैं.
भ्रष्टाचार का मुद्दा तब भी आम आदमी के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है, जब कोई आम आदमी पार्टी का नेता अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाता है.

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल भ्रष्टाचार सूचकांक

Transparency International Corruption Ranking

2018 में, भारत को ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल भ्रष्टाचार सूचकांक में 178 देशों में से 78वें स्थान पर जगह मिली है. हालंकि 2012 में भारत को 95 स्थान पर जगह मिली थी.
इस सूचकांक में 2011 से निरंतर भारत की स्तिथि में सुधार हुआ है, किंतु भारत की अभी भी सबसे भ्रष्टाचारी देशों में गिनती होती है और अब भी बहुत सुधार की गुंजाईश है.

क्या चाहते हैं मोदी

पहले सिर्फ घोटालों के नाम सामने आते थे और शायद ही आपने इन मामलों में सजा पाने वाले किसी राजनेता का नाम सुना हो.
लेकिन अब इन मामलो में सजा पाने वाले राजनेताओं के नाम भी सामने आने लगे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 आम चुनाव से पहले कहा था कि “पिछले पांच वर्षों में, मैं उन्हें जेल के दरवाज़े तक ले आया हूं, मुझे और पांच साल का समय दे, वह सभी जेल के अंदर होंगे”.
प्रधानमंत्री के इसी वादे को साकार करने के लिए देश की प्रमुख जांच एजेंसियों ने अपनी कमर कस ली है. भ्रष्ट नेताओं पर इस तेज़ी से कार्रवाई की जा रही है कि ऐसे ही चलता रहा तो विपक्ष में पार्टी तो होगी पर पार्टी में नेता नहीं होंगे. भ्रष्टाचार पर मोदी का रुख साफ है – ना खाउंगा, ना खाने दुंगा.

क्या रहा है कांग्रेस का इतिहास?

आजादी के बाद से ही कांग्रेस ने देश पर मुख्य रुप से शासन किया है.
कांग्रेस के शासन के दौरान बहुत से घोटाले भी सामने आए हैं.
बोफोर्स घोटाला, 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला (2008), सत्यम घोटाला (2009), राष्ट्रमंडल खेल घोटाला (2010), कोयला घोटाला (2012), चॉपर घोटाला (2012), टाट्रा ट्रक घोटाला (2012), आदर्श घोटाला (2012) व अन्य कई घोटाले भी इस सूची में शामिल हैं, बीमा घोटाला, दूरसंचार घोटाला (सुख राम), चारा घोटाला, केतन पारेख घोटाला, ताज कॉरिडोर मामला, तेल के लिए भोजन कार्यक्रम घोटाला, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज फ्रॉड, मधु कोड़ा, और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल हैं.

कांग्रेस शासन के दौरान हुए घोटालों की लिस्ट इतनी लम्बी है कि आप पढ़ते-पढ़ते थक जाएंगे. हाल ही में पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. उनकी गिरफ्तारी ने सबको चौंका दिया.
चिदंबरम भ्रष्टाचार के मामलों में घिरने वाले अकेले कांग्रेसी नेता नहीं है.

कांग्रेस के तमाम टॉप टू बॉटम नेता इन मामलों में शामिल है.
सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम भी इन मामलों में शामिल है जो कि नेशनल हेराल्ड केस में जमानत पर चल रहे हैं.
उनके अलावा सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी, कार्ति चिदंबरम, राज बब्बर, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, शशि थरुर, दिग्विजय सिंह,नवजोत सिंह सिद्धू समेत तमाम छोटे-बड़े कांग्रेसी नेताओं के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप है.
अगर पी चिदंबरम की तरह, इन सभी के खिलाफ कार्यवाई हुई तो बड़े नेताओं से खाली हो जाएगी कांग्रेस पार्टी.

क्या है बीजेपी पर आरोप?

कांग्रेस बीजेपी पर सीबीआई को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगा रही है. कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी डर का महौल पैदा कर रही है और विपक्ष के नेताओं के खिलाफ फर्जी मुकदमें बना रही है. बीजेपी बदले की राजनीति कर रही है और सरकार अपने विरोध का बदला सीबीआई से जांच करवा कर ले रही है. कांग्रेस का कहना है कि बाजेपी परिवर्तन निदेशालय और सीबीआई को व्यक्तिगत बदला लेने वाली एजेंसी में तब्दील कर रही है. दिलचस्प बात तो यह है कि 2010 में  सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एंकाउंटर में अमित शाह को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. उस समय पी चिदंबरम देश के गृहमंत्री थे और आज जब पी चिदंबरम को सीबीआई ने हिरासत में लिया है, तब अमित शाह देश के गृहमंत्री है. अब कांग्रेस इसे बदले की राजनीति बता रही है. कांग्रेस इसे प्रजातंत्र की हत्या बता रही है.

सिर्फ विपक्ष के नेताओं पर ही हो रही कार्रवा

देश भर में प्रमुख राजनीतिक नेता जो भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं या जिनके खिलाफ जांच की जा रही है, वह अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं. जिन नेताओं पर बीजेपी पार्टी पहले भ्रष्टाचार के आरोप लगाती थी, अब वह उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर मंत्री बना रही है. मुकुल रॉय, सुख राम के बेटे अनिल शर्मा, हिमंत बिस्वा सरमा, नारायण राणे, अन्य कुछ ऐसे राजनेताओं के नाम है, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और बाद में वह कार्रवाई से बचने के लिए बीजेपी में शामिल हुए. क्या बीजेपी में कोई भ्रष्टाचारी नेता नहीं. क्या मौजूदा भाजपा की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई सिर्फ विपक्ष तक ही सीमित है.

बीजेपी के किन नेताओं पर है भ्रष्टाचार के आरोप

बीजेपी कुछ ऐसे नेता भी हैं जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं, पर सीबीआई उन पर नरम रुख अपनाए बैठी है. बीएस येदियुरप्पा, मुकुल रोय, हिमानता बिसवा शर्मा, शिवराज सिंह चौहान,रामेश पौखरियाल, नारायन रानै, रैडी ब्रदर्स आफ बिलैरी, कुछ ऐसे राजनेता हैं जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, किंतु सीबीआई इन नेताओं पर कोई सशक्त कार्रवाई नहीं कर रही है.
टीएमसी पार्टी की प्रमुख ममता बेनर्जी ने तो बीजेपी के तमाम घोटालों की एक लिस्ट भी सार्वजनिक की है और बीजेपी को भ्रष्टाचारी जनता पार्टी करार दिया है.

TMC PARTY POSTER

ऐसा रुतबा किस ओर ले जाएगा?

तो इस वक्त देश में एक ही ताकतवर आदमी है जो कि देश के गृहमंत्री है और दुनिया के सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष भी. अब वह गृहमंत्री हैं तो जाहिर सी बात है कि इनके पास सीबीआई भी है, वो इसलिए क्योंकि हमारे देश का इतिहास ही कुछ ऐसा रहा है. सीबीआई पर अक्सर सत्ता पक्ष की कैद में होने का आरोप भी लगता रहा है.
एक वक्त जो गृहमंत्री थे, आज वो सीबीआई की कैद में है और एक वक्त जो सीबीआई की कैद में थे, आज वो देश के गृहमंत्री हैं. उस समय कांग्रेस कहा करती थी कि कानून अपना काम कर रहा है और बीजेपी बदले की राजनीति के आरोप लगाती थी. आज अमित शाह कहते हैं कि कानून अपना काम कर रहा है और कांग्रेस इसे बदले कि राजनीति बता रही है. समय का चक्र है साहिब पूरा घूमता है और घुमाता भी है.

राजनीति को समझ पाना बेहद मुश्किल है. यह कब किस तरफ का रुख अपना ले, कुछ कह नहीं सकते. इसके लिए एक अंग्रेजी शब्द का भी इस्तेमाल कर सकते हैं- “complicated”.
बदले की राजनीति: जिस नेता को आय से अधिक संपत्ती मामले में छूट मिल जाए वो कानून की निष्पक्षता के गुण-गाण करता है और जब इन नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई हो जाए तो वह इसे बदले की राजनीति करार देता है. ममता, मुलायम, मायावती, तमाम ऐसे नेता हैं जो खुद पर कार्रवाई को अक्सर बदले की राजनीति करार देते हैं.
उन तमाम नेताओं पर पूरी निष्पक्षता से कार्रवाई होनी चाहिए, जिन पर आपराधिक मामले हैं.
देश के संसद में एक भी दागी नेता नहीं बचना चाहिए.
चिदंबरम पर भी कार्रवाई होनी चाहिए और हो भी क्यों ना? इसके अलावा सरकारी शक्तियों का दुरउपयोग भी भ्रष्टाचार में गिना जाना चाहिए.




4 thoughts on “सीबीआई: कैद में है बुलबुल और सैयाद मुस्कुराए

  1. साधुवाद
    बिल्कुल सही उधेड़े हैं!
    ऐसे ही उधेड़ते रहिये

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