‘भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा कैबिनेट मंत्री जिसने गंवाई मुख्यमंत्री की कुर्सी’

रमेश पोखरियाल निशंक अभी ये मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री है.
मगर एक वक्त था जब निशंक के हाथों में उतराखंड की कमान हुआ करती थी.
मुख्यमंत्री रहने के दौरान निशंक पर घोटालों के कई गंभीर आरोप लगे.
निशंक ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिन्हें घोटालों के आरोपों की वजह से इस्तीफा देना पड़ा.
आरोपों के बाद निशंक अपने आप को बेदाग बताते रहे हैं, लेकिन कभी इन्हें गलत साबित करने के लिए पुख्ता सबूत नहीं दिए.
आज उत्तराखंड की इस सीरीज में बात पत्रकारिता से राजनीति में कदम रखने वाले निशंक की.

भगवाधारी सीएम के राज में महाकुंभ बना घोटालों का शिकार

2010 में हरिद्वार में भव्य महाकुंभ का आयोजन हुआ था तब बीजेपी शासनकाल था.
उस वक्त राज्य की बागडोर रमेश पोखरियाल निशंक के हाथों में थी.
केंद्र की यूपीए सरकार की ओर से महाकुंभ के आयोजन के लिए 565 करोड़ दिए गए.
कुंभ मेला क्षेत्र में निर्माण कार्य के लिए 17 नोडल विभागों को काम आवंटित हुए थे.
34 विभागों के अभिलेखों की जांच में ये बात सामने आई की 30 अप्रैल को महाकुंभ खत्म होने के बाद भी 54 काम अधूरे थे.
इसमें 180.07 करोड़ रु. का घोटाला सामने आया.
‘इतनी बड़ी राशि का हिसाब-किताब न तो शासन ने दिया और न ही मेलाधिकारी कार्यालय हरिद्वार ने.
तो यहां सवाल उठना तय है कि 180.07 करोड़ रु.आखिर कहां खर्च हुए?

‘हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट’ जिसने कानून को किया तार-तार

वो योजना जो राज्य के लोगों की बेहतरी के लिये शुरू हुई लेकिन मालामाल हो गए वो जिनका दूर-दूर तक पावर प्रोजेक्ट से कोई लेना देना नहीं था.
ऐसी योजना जिसमें बिजली बनाने का ठेका देने में कानून की ऐसी-तैसी कर दी गई.
वो योजना जिसके ठेके उनको दिए गए जिनके पते ही नदारद थे, यानि कि उनकी मौजूदगी पर ही सवालिया निशान थे.
ऐसी योजना जिसमें कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिये अलग-अलग कंपनियां बनाई गई.
ये सारा खेल भी खेला जा रहा था रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल के दौरान.

निशंक के कार्यकाल में उठे कई सवाल

मुख्यमंत्री के रूप में अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान निशंक के ऊपर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे.
उत्तराखंड में बिजली परियोजनाओं के आवंटन का घोटाला, टैक्सी बिल घोटाला, प्रभावशाली लोगों और कंपनियों को फायदा पंहुचाना, 56 लघु पनबिजली परियोजनाओं के आवंटन और ऋषिकेश में सिटुर्जिया हाउसिंग परियोजना में घोटालों के कई गंभीर आरोप लगे.
ऐसे तमाम मौके आए जब निशंक की वजह से उनकी पार्टी बीजेपी को शर्मिंदा होना पड़ा.
भले ही तब निशंक ने अपना पक्ष रखते हुए सफाई दी हो और अपने को बेदाग बताया हो.
लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं है कि उनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण ही केंद्र सरकार ने उन्हें हटाकर खंडूरी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया था.

विवादों से पुराना नाता

मोदी सरकार 2.0 में मानव संसाधन मंत्री बनने के बाद डिग्री विवाद ने तूल पकड़ा.
मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी कथित फेक डिग्री विवाद में घिर गए.
दरअसल, नाम के आगे डॉक्टर लगाने के उनके शौक ने उन्हें श्रीलंका स्थित एक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय से दो-दो मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया.
जबकि यह विश्वविद्यालय श्रीलंका में पंजीकृत ही नहीं है.

‘अंधविश्वास को बढ़ावा देने के भी आरोप’

अपने बयानों की वजह से भी चर्चा में रहे हैं निशंक
निशंक ने ज्योतिष को विज्ञान से भी बड़ा बताया था.
उन्होंने कहा था कि, ‘विज्ञान ज्योतिष के सामने बौना है, ज्योतिष ही सबसे बड़ी साइंस है. असल में तो ज्योतिष, साइंस से बहुत ऊपर है. हमें इसे प्रमोट करना चाहिए. हम आज न्यूक्लियर साइंस की बात करते हैं लेकिन कश्यप ऋषि ने एक लाख साल पहले ही न्यूक्लियर टेस्ट कर लिया था. हमें ट्रांसप्लांट की भी जानकारी थी’.
निशंक पर इस बयान के बाद अंधविश्वास को बढ़ावा देने के भी आरोप लगे.
लेकिन अब रमेश पोखरियाल निशंक के हाथों में मानव संसाधन विकास मंत्रालय है तो ये देखना दिलचस्प होगा की निशंक अपने इतिहास को दोहराते है या उससे इतर कुछ कर पाते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *