कलंक: जिसने पैसे के लिए सीआरपीएफ छोड़ी (पार्ट-1)

जीवन में बहुत से काम ऐसे भी होते हैं जो हमे ना चाहते हुए भी करने ही पड़ते हैं.
ये कहानी भी मैं लिखना नहीं चाहता था.
लिखता भी तो कैसे.
कैसे बताता की देश का नाम लेकर कोई शख्स देश को बेचने निकला है
असमंजस की इस स्थिति में बस एक बात थी जिसने हिम्मत दी, अपना ट्रैक रिकॉर्ड.
जब पत्रकारिता करनी शुरू की थी तबसे अब तक कभी समझौता नहीं किया था.
लिहाजा सोच लिया अंजाम चाहे जो भी हो, लिखूंगा, खुलकर लिखूंगा और जरुर लिखूंगा.

आईये शुरू करते हैं…

इस कहानी की शुरुआत होती है 5 अगस्त 2016 को.
जब अर्द्ध सैनिक बल का एक जवान वालंटियर रिटायरमेंट लेता है, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति.
चुकी उसने एक स्पेशल कोर्स कर रखा है लिहाजा उसे इस कोर्स के एवज में सरकार को 1 लाख 66 हजार रूपये जमा कराने होते हैं.

वो बड़ी आसानी से ये पैसे जमा कराता है और अपनी नौकरी छोड़ देता है.

सिपाही द्वारा जमा कराई गयी रकम की रसीद

इस जवान का नाम विवेक कुमार है और ये बिहार का रहने वाला है.
ये जवान 4 साल 5 महीने और 13 दिनों तक सीआरपीएफ में नौकरी करता है और फिर सेवानिवृत्ति ले लेता है.
सीआरपीएफ द्वारा जारी सेवा पत्र में नौकरी छोड़ने की वजह घरेलू समस्याएं बताई जाती है.

सीआरपीएफ द्वारा जारी सेवा पत्र में नौकरी छोड़ने का कारण
विवेक कुमार राय

नौकरी तो कोई भी छोड़ता है, फिर सवाल क्यों

इस कहानी में विवेक का नौकरी छोड़ना बड़ा सवाल नहीं है.
बड़ा सवाल तो ये है कि आखिर नौकरी छोड़ने के बाद ये 1 लाख 66 हजार की रकम कहाँ से आई.
ये रकम बड़ी नहीं है पर बकौल विवेक वो उस समय भी काफी ज्यादा आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे और ऐसे में अपनी लगभग 7 महीने की तनख्वाह वो क्यों गवाना चाहेंगे?

ये सवाल अचानक क्यों उठे?

पिछले दिनों विवेक ने अपने फेसबुक एकाउंट के जरिये एक वीडियो जारी किया. उस वीडियो में एक निजी चैनल के सीईओ पर आरोप लगाते हुए विवेक ने बताया कि उसे 30 लाख रुपये का लालच देकर नौकरी छुड़वा दी गयी और साथ ही उसे एक दूसरे इदारे में नौकरी दिलवाने का भी झूठा वादा किया गया.

बकौल विवेक 2016 से लेकर अब तक वो लगातार सीईओ से मदद की अपील करता रहा पर उसे मदद नहीं मिली और वो इस वक़्त काफी बुरे दौर से गुजर रहा है.

जब ये वीडियो पब्लिक डोमेन में आया तो मुझे हैरानी हुई. पत्रकार होने के नाते मैं उक्त सीईओ से आंशिक रूप से परिचित था और अक्सर सुनता रहता था कि उन्होंने काफी लोगों की आर्थिक मदद करी है.

ऐसे में विवेक का किस्सा हजम नहीं हो पा रहा था और मैने विवेक से संपर्क करने की ठानी.

मेरे टीम के सदस्य आकाश सेठी ने फेसबुक पर विवेक से सम्पर्क किया और उसका नम्बर प्राप्त किया. मैने उसे फोन किया और बात-चीत करी.

वीडियो में अपनी आर्थिक तंगी का रोना रो रहे विवेक से बात करने के बाद बहुत सी चीजें स्पष्ट होती गयी. मसलन-

1. Crpf छोड़ने की बड़ी वजह कम वेतन था

2. Crpf छोड़ने के बाद उक्त सीईओ की मदद से उसे एक कम्पनी में दूनी सैलरी पर नौकरी मिली थी

3. नौकरी के साथ-साथ विवेक ने अपनी सिक्योरिटी कम्पनी भी खोल ली जो सीधे तौर पर कम्पनी के साथ धोखा थी

4. उक्त सीईओ के ही चैनल ने सबसे पहले मदद करते हुए विवेक के गार्ड्स की सेवाएं ली

5. सीईओ ने स्वयं निजी सुरक्षा के लिए भी 4 पीएसओ की सेवाएं इसकी एजेंसी से ली और इन सभी का समय पर उचित भुगतान भी किया

6. कुछ कारण वश चैनल ने गार्ड्स की सेवाओं में कटौती की और निजी पीएसओ में भी कटौती की गई सेवाओं की खराबी के कारण

विवेक और मेरे बीच की बातचीत सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें

इस बातचीत के जरिये ये भी पता चला कि विवेक अभी भी उस कम्पनी में काम कर रहे हैं और हर महीने एक ठीक-ठाक वेतन उठा रहे हैं।

इस बात-चीत से ये स्पष्ट हो चुका था कि विवेक अपनी एजेंसी की सुविधाओं के बंद हो जाने के कारण अनर्गल आरोप लगा रहे थे.

एमसीए की साईट पर विवेक की कम्पनी डिटेल्स

बात मेरे हिस्से की

लेकिन मेरी पड़ताल किसी व्यक्ति विशेष की प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं थी अपितु देश के सम्मान और सुरक्षा को समर्पित थी.

नहीं पता आप कैसे रिएक्ट करेंगे लेकिन पत्रकार होने के नाते मेरे नजदीक ये मसला बेहद संवेदनशील था. एक व्यक्ति अर्द्धसैनिक बल में भर्ती होता है.

एक स्पेशल ट्रेंनिग कोर्स पूरा करता है और फिर नौकरी छोड़ देता है. नौकरी छोड़ते समय जुर्माने के तौर पर वो लगभग अपनी 7 महीने की तनख्वाह भी जमा कराता है.

कहीं ठीक-ठाक सैलरी पर नौकरी भी जॉइन कर लेता है और इसी दौरान उस कम्पनी कम्पनी को धोखा देते हुए उसी वर्किंग नेचर की अपनी कम्पनी भी खोलता है.
इन तमाम चीजों के बीच वो अब सेना की वर्दी पहनकर फेसबुक पर सरेआम विक्टिम कार्ड खेल रहा है.
वो लोगों की सोशल इमेज को चंद रुपयों की खातिर बर्बाद करने की सुपारी ले रहा है.
और इन सबके लिए एक ही हथियार है उसके पास ‘अर्द्ध सैनिक बल का पूर्व जवान होना’

सवाल बहुत से हैं.. जवाब कुछ के मिले हैं.. कुछ के बाकी हैं..

पड़ताल अब भी जारी है.. इसी लेख के अगले भाग में हम आपको विवेक के काले कारनामों से परिचित कराएंगे.
तब तक के लिए विवेक से मात्र एक ही सवाल है.
उन 1 लाख 66 हजार रुपयों का स्रोत सार्वजनिक करें.

शुक्रीया

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